1 दिन मैं अपने कमरे में थी, तभी मेरा भाई आया और उसने मुझे बेड पर पटक दिया और फिर वह कपड़े खोलने लगा। फिर उसकी हरकत देखकर मेरी होश उड़ गई। दोस्तों मेरा नाम प्रतिमा है और मैं अभी भी कर रही हूँ और मैंने प्राइमरी स्कूल में टीचर के लिए परीक्षा भी दिया है। हमारे घर में कुल चार लोग रहते हैं।
1 दिन मैं अपने भाई से कुछ कुछ सीक्रेट बातें कर रही थी। मैंने उससे पूछा राहुल तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं? राहुल बोला नहीं दीदी, अभी तक ऐसी कोई नहीं मिली। अगर आप जैसे मिले तब तो प्रयास करूँगा। इतने में ही वहाँ पर मम्मी आ गई और वो राहुल को किसी काम से बाहर लेकर चली गई।
मेरे भाई के मुँह से आप जैसी बात सुनकर मेरे तो होश उड़ गए थे, मैं बस उसके ही बारे में सोच रही थी। यही सब सोचते सोचते कब मेरी आंख लग गई, मुझे पता भी नहीं चला। फिर जब मैं उठी तो मैंने देखा घर में कोई भी नहीं है। शायद मम्मी और राहुल अभी तक नहीं आए थे। फिर मैं बाथरूम में जाकर नहाने लगी।
तभी माँ और राहुल भी मार्केट से आ गए तो मैं उसके पास जाकर बातें करने लगी। फिर वह अपने स्कूल चला गया और मैं भी अपने कॉलेज चली गई और मैं अपने कॉलेज में जाकर अपने भाई के बारे में ही सोच रही थी क्योंकि आज तक किसी ने मेरे पर डोरे नहीं डाला था। फिर तभी मेरी एक सहेली मेरे पास आई और बोली, अरे प्रतिमा
तुम क्या सोच रही हो? इस पर मैं बोली नहीं नेहा मैं तो कुछ भी नहीं सोच रही हूँ। फिर मैंने उससे पूछा कि नेहा यार कोई बताओ कि कैसे पैसा कमाया जाए क्योंकि अब तो हमारा कॉलेज भी खत्म होने वाला है। नेहा मुझे गुस्से से देखी और बोली, अरे चल यार हमारे लिए पैसे कमाना आम बात है।
फिर हम दोनों अपने अपने घर की तरफ जाने लगे क्योंकि हमारा क्लास नहीं चल रहा था। मेरी सहेली अपने घर की तरफ जाने लगी। इधर मैं भी जा रही थी तभी मैंने रास्ते में अपने भाई राहुल को देखा। मुझे तो उसको देखकर मेरा होश उड़ गया था। राहुल अपने साथ तीन लड़कियों को लेकर घूम रहा था। मुझे उस पर काफी ज्यादा गुस्सा आ रहा था।
क्योंकि पापा इतना करके यह पैसा लाते हैं और हमें पढ़ने के लिए देते हैं, लेकिन ये सारा पैसा बर्बाद कर रहा है। फिर मैं उसी गुस्से में घर चली आई और राहुल के आने का इंतजार करने लगी। मैं मम्मी पापा को भी ये सब बातें बताना चाहती थी, लेकिन मैंने नहीं बताया कि शायद उन्हें ठेस पहुंचेगी। फिर शाम के समय जब राहुल घर आया।
तो मैं उसके कमरे में गई और देखा तो वह टीवी देख रहा था। मैंने उससे पूछा राहुल तुम मार्केट में लड़कियों के साथ क्यों घूम रहे थे? उनके साथ मत रहो वरना वह तुम्हें बर्बाद कर देंगी। उसने कहा नहीं दीदी, मैं तो घूमू उनके साथ घूमने में काफी मज़ा आता है और मेरे लिए यही समय है। अब नहीं घूमूं तो कब घूमूं
वो मुझसे गुस्से में बोल रहा था। मैंने उसे बहुत बार समझाया कि तुम ऐसा मत करो लेकिन वह नहीं मान रहा था। मेरे बहुत कोशिशों के बाद वो बोला ठीक है, उनके साथ नहीं घूमूं लेकिन मेरी भी एक शर्त है अगर तुम पूरा करोगी तो मैं उनके साथ रहना भी छोड़ दूंगा। मैं बोली हाँ बताओ।
क्या शर्त है तुम्हारी? राहुल तुरंत बोला जैसे वह लड़कियां मेरे साथ घूमती है। अब से तुम मेरे साथ घूमोगी और मेरी जरूरतों को भी पूरा करोगी। मैंने उससे कहा नहीं ये नहीं हो सकता, मैं भला क्यों तुम्हारे साथ तो इस पर राहुल बोला तो फिर ठीक है, मुझे मत समझाओ, मैंने जो भी किया।
उसके बाद वह मुझसे कुछ नहीं कह पाया और मैंने उसकी बातों पर ध्यान देते हुए कहा ठीक है, शाम को सोचकर बताती हूँ। यह कहकर मैं उसके कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली आई कमरे में बैठकर सोचने लगी कि अब मुझे समझ में आ गया है कि मेरा भाई मुझसे क्या चाहता था? फिर मुझे कुछ दिन पहले की एक घटना याद आई।
जब वह मुझे एक अलग नजर से देख रहा था, उस दिन मैंने उसे पूरी तरह से समझ लिया था कि वह मुझसे क्या चाहता था। अब मेरे सामने बड़ी समस्या थी कि मैं क्या करूँगी? अगर मैंने ना कह दिया तो वह उन लड़कियों के साथ घुल मिलकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेगा और उसकी पढ़ाई भी खराब हो जाएगी।
वहीं अगर मैं हाँ बोल देती तो फिर मेरे लिए यह एक बहुत बड़ी उलझन थी क्योंकि वह मेरा भाई था और परिवार में कोई भी इस बात को नहीं समझ पाता। इन्हीं सब विचारों में खोई हुई मैंने सोचा कि शायद यह सही है और अगर ये सिर्फ घर के अंदर ही रहे तो हमारी इज्जत भी बनी रहेंगी और मेरा भाई भी सुधार जाएगा।
मैं सोचते सोचते सो गई। सुबह उठते ही मैं राहुल के कमरे में गई, अब मैं भी जैसे एक नई दिशा में सोचने लगी थी। मैंने राहुल से कहा ठीक है, मुझे तुम्हारी शर्त मान्य है, लेकिन हम पहले शॉपिंग करेंगे, जो तुम्हें करना है वह कर लेना, लेकिन एक बात का ध्यान रखना यह बात बाहर किसी को नहीं बतानी चाहिए। और हाँ
तुम उन लड़कियों से अब कभी भी मत मिलना। राहुल ने मुझे देखा और बोला ठीक है दीदी आज के बाद तुम जैसा कहोगी वैसा ही करूँगा। उसकी आँखों में खुशी और संतुष्टि थी। वह वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहा था और आखिरकार वह दिन आ ही गया था।
