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गुरुवार, 2 जनवरी 2025

मेरा नाम अनीता है (part 1)

 मेरा नाम अनीता है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। मैं 24 साल की हूँ और अपनी खूबसूरती के लिए अक्सर तारीफें पाती थीं। हमारे परिवार में मेरे जेठजी का बच्चा छोटा था और मुझे उसकी देखभाल करनी होती थी। जब मैं उसे दूध पिलाती तो अक्सर जेठजी मेरे पास आकर खड़े हो जाते।

मुझे शर्मिंदगी महसूस होती लेकिन मैं चुप रहती जेठजी ने मुझे ₹3000 महीना देना शुरू कर दिया था और मैं उस पैसे की वजह से कुछ कह नहीं पाती थी। मेरे लिए वो पैसे जरूरी थे क्योंकि मेरे पति की तनख्वाह बहुत कम थी और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। एक रात अचानक।

जेठ जी का बच्चा बुखार में तपने लगा। वो बहुत परेशान थे और उसे दवा देने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनके कमरे में ही रुक जाऊं ताकि बच्चे का ख्याल रख सकूँ। मैं मान गई लेकिन उस रात कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे होश उड़ा दिए। जेठ जी धीरे से मेरे करीब आए और कहने लगे।

कि उन्हें भी दूध पीने की इच्छा हो रही है। उनकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सा भाव उठने लगा। मेरे जेठ जी तंदुरुस्त थे और उनकी तुलना में मेरे पति कमजोर थे। मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई और उस रात सब कुछ बदल गया। मेरे पति की तनख्वाह इतनी कम थी कि घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था।

ऊपर से हमारा छोटा बच्चा भी था, जिसे मैं छोड़कर कहीं नौकरी नहीं कर सकती थी। 1 दिन जेठजी ने मुझसे एक अजीब सी बात कही। वो बोले कि उनके कुछ जानने वालों को ऐसी महिला की जरूरत है जो उनके बच्चे की देखभाल कर सके। उन्होंने कहा कि अगर मैं राजी हो जाऊं तो वो मुझे अच्छी रकम देंगे।

मैंने इस बारे में सोचना शुरू किया, लेकिन मुझे लगा कि शायद मेरा पति इस बात के लिए राजी नहीं होगा। बाद में मैंने ये बात अपनी पड़ोसन से साझा की। उसने कहा कि अगर ऐसा मौका है तो मुझे इसे स्वीकार कर लेना चाहिए। उसने समझाया कि ये घर की ही बात है और इसमें कोई बुराइ नहीं है, लेकिन मैं मन ही मन उलझन में थी।

मुझे लग रहा था कि ये सब सही नहीं है पर पड़ोसन ने मुझे मनाने की कोशिश की और कहा कि अगर रिश्तेदार ही एक दूसरे के काम नहीं आएँगे तो कौन आएगा? उसने ये भी कहा कि इससे न सिर्फ मेरी आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी बल्कि मेरे पति के भाई का भी भला होगा। मैंने सोचा कि इस बारे में सोचकर देखती हूँ।

आखिरकार घर में जो हालत थी, उसमें बदलाव की जरूरत थी। सूखी रोगियों पर जीने की आदत हो गई थी और मेरे बच्चे की परवरिश भी ढंग से नहीं हो पा रही थी। मेरे जेठ जी विदेश से लौटे थे और अब उनका खुद का बिज़नेस था। वो खूब पैसे कमाते थे जबकि मेरे पति पूरे दिन घर में बेकार बैठे रहते थे।

मेरे सांस के गुजर जाने के बाद मेरे पति को नशे की लत लग गई थी और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खराब कर ली थी। मैंने कई बार उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वो उल्टा मुझ पर ही हाथ उठाने लगते थे। मेरे जेठ जी की जिंदगी सफल हो चुकी थी और मेरे पास कुछ भी नहीं था।

मैंने मन ही मन सोचा कि मुझे उनके बेटे की परवरिश की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। शायद इससे मेरी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। मेरा बेटा बहुत छोटा था और मैं उसे अकेले छोड़कर बाहर नौकरी करने नहीं जा सकती थी। 1 दिन जब मेरा पति घर आया तो उसका मूड ठीक था। मैंने सोचा कि इसी मौके का फायदा उठाकर

उससे इस बारे में बात करूँ। मैं पानी लाने के बहाने उसके पास गई और बातचीत शुरू की। मन में सवाल था कि अगर मैं ये कदम उठाती हूँ तो उसका क्या असर होगा? क्या मेरा पति मुझसे नाराज होगा? लेकिन मुझे अब अपने बच्चों का भविष्य भी देखना था। महंगाई इतनी बढ़ गई थी कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था।

मेरे मन में हर तरफ से सवाल उठ रहे थे, क्या मैं सही कर रही हूँ? क्या जेठ जी की मदद से मेरा जीवन आसान हो जाएगा? क्या मेरे पति इस बात को समझेंगे?

आखिरकार मैंने तय किया कि मैं इस बारे में जेठ जी से बात करूँगी और उनसे पूछूंगी कि वो कितने पैसे देंगे अगर मुझे सही रकम मिली।

तो मैं उनके बेटे की देखभाल के लिए तैयार हो जाऊँगी, लेकिन यह कदम उठाना इतना आसान नहीं था। मुझे अपने बेटे की भी परवरिश करनी थी और साथ ही जेठजी के बेटे को भी मैंने सोचा अगर वो मुझे सही तनख्वाह देंगे तो मैं ये काम कर सकती हूँ पर अगर तनख्वाह कम हुई तो मैं साफ मना कर दूंगी।

ऐसे विचारों में खोई हुई थी कि तभी मेरा पति मेरे पास आया। उसका चेहरा शांत था। मुझे लगा कि शायद अब समय आ गया है कि मैं उससे इस बारे में बात करूँ। आज तक तो कभी तुमने एक ग्लास पानी तक न दिया। आज क्या जरूरत पड़ गई? मैंने कहा, मैं सोच रही थी कि मैं जेठ जीके यहाँ काम कर लेती हूँ। ये बात सुनकर।

वह मुझे बड़ी अजीब नजरों से देखने लगे। इसके आगे मेरे से कह पाना बड़ा ही मुश्किल था। मेरे माथे से पसीने छूटने लगे थे। कहीं मेरा पति मुझे ही छांटा न मार दे। फिर मैंने हिम्मत करके उनसे कहा कि जेट जी कुछ दिनों पहले मुझे कह रहे थे कि उन्हें अपने बेटे की परवरिश के लिए किसी औरत की जरूरत है।

मैं सोच रही थी अगर मैं ही उनके बेटे की परवरिश कर लूँ तो इसके बदले मुझे अच्छी तनख्वाह भी मिल जाएगी और हमारा घर का गुज़ारा भी हो जाएगा। जब मैं पूरी बात कहीं तभी मेरे पति के हाथ से पानी का गिलास नीचे गिर गया और वह कहने लगा कि तुम्हें कोई जरूरत नहीं है मेरे भाई के घर पर जाने की। मैंने कहा।

लेकिन तुम तुम्हारी तो इतनी तनख्वाह भी नहीं है, तुम जो कमाते हो, वह सारा का सारा अपने नशे में उड़ा देते हो तो मेरे बच्चों का क्या होगा? मैंने कहा कि अगर वह मुझे अच्छी खासी तनख्वाह देंगे तभी मैं काम करूँगी, नहीं तो मैं इनकार करके चली आ जाउंगी। मेरे पति बार बार मुझे इनकार ही कर रहे थे।



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