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सोमवार, 13 जनवरी 2025

मेरा भाई आया और उसने मुझे बेड पर पटक दिया

 1 दिन मैं अपने कमरे में थी, तभी मेरा भाई आया और उसने मुझे बेड पर पटक दिया और फिर वह कपड़े खोलने लगा। फिर उसकी हरकत देखकर मेरी होश उड़ गई। दोस्तों मेरा नाम प्रतिमा है और मैं अभी भी कर रही हूँ और मैंने प्राइमरी स्कूल में टीचर के लिए परीक्षा भी दिया है। हमारे घर में कुल चार लोग रहते हैं।


मैं, मेरे भाई और मेरे मम्मी पापा रहते हैं। मेरी उम्र अभी 21 साल है। मैं अपने शरीर को भी काफी मेंटेन करके रखती हूँ और रोज़ सुबह सुबह व्यायाम भी करती हूँ जिससे कि मैं फिट रह सकूँ। मेरे भाई की उम्र 19 साल है। हम दोनों एक दोस्त की तरह रहते हैं। जीस वजह से हम दोनों आपस में एक दूसरे की बात भी शेयर करते हैं।

1 दिन मैं अपने भाई से कुछ कुछ सीक्रेट बातें कर रही थी। मैंने उससे पूछा राहुल तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं? राहुल बोला नहीं दीदी, अभी तक ऐसी कोई नहीं मिली। अगर आप जैसे मिले तब तो प्रयास करूँगा। इतने में ही वहाँ पर मम्मी आ गई और वो राहुल को किसी काम से बाहर लेकर चली गई।

मेरे भाई के मुँह से आप जैसी बात सुनकर मेरे तो होश उड़ गए थे, मैं बस उसके ही बारे में सोच रही थी। यही सब सोचते सोचते कब मेरी आंख लग गई, मुझे पता भी नहीं चला। फिर जब मैं उठी तो मैंने देखा घर में कोई भी नहीं है। शायद मम्मी और राहुल अभी तक नहीं आए थे। फिर मैं बाथरूम में जाकर नहाने लगी।

तभी माँ और राहुल भी मार्केट से आ गए तो मैं उसके पास जाकर बातें करने लगी। फिर वह अपने स्कूल चला गया और मैं भी अपने कॉलेज चली गई और मैं अपने कॉलेज में जाकर अपने भाई के बारे में ही सोच रही थी क्योंकि आज तक किसी ने मेरे पर डोरे नहीं डाला था। फिर तभी मेरी एक सहेली मेरे पास आई और बोली, अरे प्रतिमा

तुम क्या सोच रही हो? इस पर मैं बोली नहीं नेहा मैं तो कुछ भी नहीं सोच रही हूँ। फिर मैंने उससे पूछा कि नेहा यार कोई बताओ कि कैसे पैसा कमाया जाए क्योंकि अब तो हमारा कॉलेज भी खत्म होने वाला है। नेहा मुझे गुस्से से देखी और बोली, अरे चल यार हमारे लिए पैसे कमाना आम बात है।

फिर हम दोनों अपने अपने घर की तरफ जाने लगे क्योंकि हमारा क्लास नहीं चल रहा था। मेरी सहेली अपने घर की तरफ जाने लगी। इधर मैं भी जा रही थी तभी मैंने रास्ते में अपने भाई राहुल को देखा। मुझे तो उसको देखकर मेरा होश उड़ गया था। राहुल अपने साथ तीन लड़कियों को लेकर घूम रहा था। मुझे उस पर काफी ज्यादा गुस्सा आ रहा था।

क्योंकि पापा इतना करके यह पैसा लाते हैं और हमें पढ़ने के लिए देते हैं, लेकिन ये सारा पैसा बर्बाद कर रहा है। फिर मैं उसी गुस्से में घर चली आई और राहुल के आने का इंतजार करने लगी। मैं मम्मी पापा को भी ये सब बातें बताना चाहती थी, लेकिन मैंने नहीं बताया कि शायद उन्हें ठेस पहुंचेगी। फिर शाम के समय जब राहुल घर आया।

तो मैं उसके कमरे में गई और देखा तो वह टीवी देख रहा था। मैंने उससे पूछा राहुल तुम मार्केट में लड़कियों के साथ क्यों घूम रहे थे? उनके साथ मत रहो वरना वह तुम्हें बर्बाद कर देंगी। उसने कहा नहीं दीदी, मैं तो घूमू उनके साथ घूमने में काफी मज़ा आता है और मेरे लिए यही समय है। अब नहीं घूमूं तो कब घूमूं

वो मुझसे गुस्से में बोल रहा था। मैंने उसे बहुत बार समझाया कि तुम ऐसा मत करो लेकिन वह नहीं मान रहा था। मेरे बहुत कोशिशों के बाद वो बोला ठीक है, उनके साथ नहीं घूमूं लेकिन मेरी भी एक शर्त है अगर तुम पूरा करोगी तो मैं उनके साथ रहना भी छोड़ दूंगा। मैं बोली हाँ बताओ।

क्या शर्त है तुम्हारी? राहुल तुरंत बोला जैसे वह लड़कियां मेरे साथ घूमती है। अब से तुम मेरे साथ घूमोगी और मेरी जरूरतों को भी पूरा करोगी। मैंने उससे कहा नहीं ये नहीं हो सकता, मैं भला क्यों तुम्हारे साथ तो इस पर राहुल बोला तो फिर ठीक है, मुझे मत समझाओ, मैंने जो भी किया।

उसके बाद वह मुझसे कुछ नहीं कह पाया और मैंने उसकी बातों पर ध्यान देते हुए कहा ठीक है, शाम को सोचकर बताती हूँ। यह कहकर मैं उसके कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली आई कमरे में बैठकर सोचने लगी कि अब मुझे समझ में आ गया है कि मेरा भाई मुझसे क्या चाहता था? फिर मुझे कुछ दिन पहले की एक घटना याद आई।

जब वह मुझे एक अलग नजर से देख रहा था, उस दिन मैंने उसे पूरी तरह से समझ लिया था कि वह मुझसे क्या चाहता था। अब मेरे सामने बड़ी समस्या थी कि मैं क्या करूँगी? अगर मैंने ना कह दिया तो वह उन लड़कियों के साथ घुल मिलकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेगा और उसकी पढ़ाई भी खराब हो जाएगी।

वहीं अगर मैं हाँ बोल देती तो फिर मेरे लिए यह एक बहुत बड़ी उलझन थी क्योंकि वह मेरा भाई था और परिवार में कोई भी इस बात को नहीं समझ पाता। इन्हीं सब विचारों में खोई हुई मैंने सोचा कि शायद यह सही है और अगर ये सिर्फ घर के अंदर ही रहे तो हमारी इज्जत भी बनी रहेंगी और मेरा भाई भी सुधार जाएगा।

मैं सोचते सोचते सो गई। सुबह उठते ही मैं राहुल के कमरे में गई, अब मैं भी जैसे एक नई दिशा में सोचने लगी थी। मैंने राहुल से कहा ठीक है, मुझे तुम्हारी शर्त मान्य है, लेकिन हम पहले शॉपिंग करेंगे, जो तुम्हें करना है वह कर लेना, लेकिन एक बात का ध्यान रखना यह बात बाहर किसी को नहीं बतानी चाहिए। और हाँ

तुम उन लड़कियों से अब कभी भी मत मिलना। राहुल ने मुझे देखा और बोला ठीक है दीदी आज के बाद तुम जैसा कहोगी वैसा ही करूँगा। उसकी आँखों में खुशी और संतुष्टि थी। वह वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहा था और आखिरकार वह दिन आ ही गया था।

सोमवार, 6 जनवरी 2025

लिंग में ढीलेपन का मतलब

 लिंग में ढीलेपन का मतलब नसों में तनाव न रहना नसों में तनाव न रहने का मतलब नसों का कमजोर हो जाना। वो नसे जो लिंग तक ब्लड को तेजी से बढ़ाने का काम करती हैं, उस तक लेकर जाती हैं जिसके वजह से लिंग जो है उस में तनाव आता है, उस कार्य में किसी तरह का अवरोध या रुकावट पैदा होना।

इसका समाधान अगर आपने निकाल लिया, तो आपके लिंग के ढीलेपन की समस्या खुद ब खुद दूर हो जाएगी और इसमें आपको बेहतर कसाव नजर आएगा। अब इसके सलूशन आपको किस में मिलेगा? हेल्ती डाइट में, वर्कआउट में और आयल मसाज में।

तो बैलेंस डाइट लेना शुरू कीजिए प्रोटीन युक्त खाना शुरू कीजिए ऐसा खाना जिसमें विटामिन डी, जिंक, मैग्नीशियम इस तरह की जो चीजें हैं उनका समावेश ज्यादा हो जो आपके अंदर की जो अंदरूनी शारीरिक तौर पर कमजोरी है उसको दूर करने का काम करे।

लिंग में अगर तनाव बढ़ाना है तो मानसिक तौर पर ये बढ़ने वाले तनाव को भी कम करना होगा। क्योंकि यही मानसिक तनाव आपकी जो सेक्शुअल परफॉरमेंस है उसे खराब करने का काम करता है।

पैल्विक मसल्स की एक्सर्साइज़ भी जरूर करें कीगल एक्सर्साइज़ को हफ्ते में दो बार जरूर करें क्योंकि ये आपके पैल्विक मसल्स को मजबूत करने का काम करता है। उनको सवस्थ और हेल्ती बनाने का काम करता है। साथ ही इलेक्शन को मजबूत करता है।

साथ ही साथ एक बेहतर आयल से अपने पीनस की मसाज करना शुरू करें। आयल आप कोई भी यूज़ कर सकते हो आपके ऊपर है जो आपको सूट करता हो, कोई एलर्जी इश्यू ना हो वो बादाम का आयल भी हो सकता है। सरसों का आयल भी हो सकता है। ओलिव आयल भी हो सकता है जो आपको सूट करे लेकिन अगर आप नेचुर मानिया का नेचुर मानिया का।

लिफ्ट अप आयल यूज़ करते हैं। ये आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। आपको डिज़ायर्ड रिसाल्ट पाने में मदद कर सकता है। ध्यान से देख लीजिए क्योंकि ये आयल नहीं आयुर्वेदिक औषधि है 100% नैचुरल क्लिनिकली टेस्टेड एंड सर्टिफाइड

ये आयल मिक्सचर है। कुछ खास जड़ी बूटियों का अश्वगंधा, सफेद मुछली, शतावरी जैसे 17 नेचुरल हर्ब्स इसमें मिली हुई है जो की इसकी तासीर को गर्म करने का काम करती है। मतलब ये जो आयल है ये एक तरह से गर्म आयल है। नैचुरली

जिसके वजह से ना केवल बाहरी तौर पर बल्कि अंदरूनी तौर पर भी। आपके पीनस में जो नसें हैं, जिनमें किसी तरह की कोई ब्लॉकेज होती है, उसको दूर करने का काम करती है, लिंगा में होने वाले इलेक्शन को बढ़ाती है, उसे मजबूत करती है जिसकी वजह से आप लॉन्ग लास्टर बनते है। आपकी सेक्शुअल परमेंस भी बढ़िया होती है।

गुरुवार, 2 जनवरी 2025

मेरा नाम अनीता है (part 1)

 मेरा नाम अनीता है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। मैं 24 साल की हूँ और अपनी खूबसूरती के लिए अक्सर तारीफें पाती थीं। हमारे परिवार में मेरे जेठजी का बच्चा छोटा था और मुझे उसकी देखभाल करनी होती थी। जब मैं उसे दूध पिलाती तो अक्सर जेठजी मेरे पास आकर खड़े हो जाते।

मुझे शर्मिंदगी महसूस होती लेकिन मैं चुप रहती जेठजी ने मुझे ₹3000 महीना देना शुरू कर दिया था और मैं उस पैसे की वजह से कुछ कह नहीं पाती थी। मेरे लिए वो पैसे जरूरी थे क्योंकि मेरे पति की तनख्वाह बहुत कम थी और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। एक रात अचानक।

जेठ जी का बच्चा बुखार में तपने लगा। वो बहुत परेशान थे और उसे दवा देने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनके कमरे में ही रुक जाऊं ताकि बच्चे का ख्याल रख सकूँ। मैं मान गई लेकिन उस रात कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे होश उड़ा दिए। जेठ जी धीरे से मेरे करीब आए और कहने लगे।

कि उन्हें भी दूध पीने की इच्छा हो रही है। उनकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सा भाव उठने लगा। मेरे जेठ जी तंदुरुस्त थे और उनकी तुलना में मेरे पति कमजोर थे। मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई और उस रात सब कुछ बदल गया। मेरे पति की तनख्वाह इतनी कम थी कि घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था।

ऊपर से हमारा छोटा बच्चा भी था, जिसे मैं छोड़कर कहीं नौकरी नहीं कर सकती थी। 1 दिन जेठजी ने मुझसे एक अजीब सी बात कही। वो बोले कि उनके कुछ जानने वालों को ऐसी महिला की जरूरत है जो उनके बच्चे की देखभाल कर सके। उन्होंने कहा कि अगर मैं राजी हो जाऊं तो वो मुझे अच्छी रकम देंगे।

मैंने इस बारे में सोचना शुरू किया, लेकिन मुझे लगा कि शायद मेरा पति इस बात के लिए राजी नहीं होगा। बाद में मैंने ये बात अपनी पड़ोसन से साझा की। उसने कहा कि अगर ऐसा मौका है तो मुझे इसे स्वीकार कर लेना चाहिए। उसने समझाया कि ये घर की ही बात है और इसमें कोई बुराइ नहीं है, लेकिन मैं मन ही मन उलझन में थी।

मुझे लग रहा था कि ये सब सही नहीं है पर पड़ोसन ने मुझे मनाने की कोशिश की और कहा कि अगर रिश्तेदार ही एक दूसरे के काम नहीं आएँगे तो कौन आएगा? उसने ये भी कहा कि इससे न सिर्फ मेरी आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी बल्कि मेरे पति के भाई का भी भला होगा। मैंने सोचा कि इस बारे में सोचकर देखती हूँ।

आखिरकार घर में जो हालत थी, उसमें बदलाव की जरूरत थी। सूखी रोगियों पर जीने की आदत हो गई थी और मेरे बच्चे की परवरिश भी ढंग से नहीं हो पा रही थी। मेरे जेठ जी विदेश से लौटे थे और अब उनका खुद का बिज़नेस था। वो खूब पैसे कमाते थे जबकि मेरे पति पूरे दिन घर में बेकार बैठे रहते थे।

मेरे सांस के गुजर जाने के बाद मेरे पति को नशे की लत लग गई थी और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खराब कर ली थी। मैंने कई बार उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वो उल्टा मुझ पर ही हाथ उठाने लगते थे। मेरे जेठ जी की जिंदगी सफल हो चुकी थी और मेरे पास कुछ भी नहीं था।

मैंने मन ही मन सोचा कि मुझे उनके बेटे की परवरिश की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। शायद इससे मेरी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। मेरा बेटा बहुत छोटा था और मैं उसे अकेले छोड़कर बाहर नौकरी करने नहीं जा सकती थी। 1 दिन जब मेरा पति घर आया तो उसका मूड ठीक था। मैंने सोचा कि इसी मौके का फायदा उठाकर

उससे इस बारे में बात करूँ। मैं पानी लाने के बहाने उसके पास गई और बातचीत शुरू की। मन में सवाल था कि अगर मैं ये कदम उठाती हूँ तो उसका क्या असर होगा? क्या मेरा पति मुझसे नाराज होगा? लेकिन मुझे अब अपने बच्चों का भविष्य भी देखना था। महंगाई इतनी बढ़ गई थी कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था।

मेरे मन में हर तरफ से सवाल उठ रहे थे, क्या मैं सही कर रही हूँ? क्या जेठ जी की मदद से मेरा जीवन आसान हो जाएगा? क्या मेरे पति इस बात को समझेंगे?

आखिरकार मैंने तय किया कि मैं इस बारे में जेठ जी से बात करूँगी और उनसे पूछूंगी कि वो कितने पैसे देंगे अगर मुझे सही रकम मिली।

तो मैं उनके बेटे की देखभाल के लिए तैयार हो जाऊँगी, लेकिन यह कदम उठाना इतना आसान नहीं था। मुझे अपने बेटे की भी परवरिश करनी थी और साथ ही जेठजी के बेटे को भी मैंने सोचा अगर वो मुझे सही तनख्वाह देंगे तो मैं ये काम कर सकती हूँ पर अगर तनख्वाह कम हुई तो मैं साफ मना कर दूंगी।

ऐसे विचारों में खोई हुई थी कि तभी मेरा पति मेरे पास आया। उसका चेहरा शांत था। मुझे लगा कि शायद अब समय आ गया है कि मैं उससे इस बारे में बात करूँ। आज तक तो कभी तुमने एक ग्लास पानी तक न दिया। आज क्या जरूरत पड़ गई? मैंने कहा, मैं सोच रही थी कि मैं जेठ जीके यहाँ काम कर लेती हूँ। ये बात सुनकर।

वह मुझे बड़ी अजीब नजरों से देखने लगे। इसके आगे मेरे से कह पाना बड़ा ही मुश्किल था। मेरे माथे से पसीने छूटने लगे थे। कहीं मेरा पति मुझे ही छांटा न मार दे। फिर मैंने हिम्मत करके उनसे कहा कि जेट जी कुछ दिनों पहले मुझे कह रहे थे कि उन्हें अपने बेटे की परवरिश के लिए किसी औरत की जरूरत है।

मैं सोच रही थी अगर मैं ही उनके बेटे की परवरिश कर लूँ तो इसके बदले मुझे अच्छी तनख्वाह भी मिल जाएगी और हमारा घर का गुज़ारा भी हो जाएगा। जब मैं पूरी बात कहीं तभी मेरे पति के हाथ से पानी का गिलास नीचे गिर गया और वह कहने लगा कि तुम्हें कोई जरूरत नहीं है मेरे भाई के घर पर जाने की। मैंने कहा।

लेकिन तुम तुम्हारी तो इतनी तनख्वाह भी नहीं है, तुम जो कमाते हो, वह सारा का सारा अपने नशे में उड़ा देते हो तो मेरे बच्चों का क्या होगा? मैंने कहा कि अगर वह मुझे अच्छी खासी तनख्वाह देंगे तभी मैं काम करूँगी, नहीं तो मैं इनकार करके चली आ जाउंगी। मेरे पति बार बार मुझे इनकार ही कर रहे थे।



मुझे तो घर चाहिए था, दिल नहीं"

एक छोटे से मोहल्ले में, एक लड़का अर्जुन रहता था। वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से था, और उसे दिल्ली में नौकरी के लिए एक किराये का घर चाहिए था। उसे एक छोटी सी कॉलोनी में एक प्यारा सा फ्लैट मिला, जिसका किराया थोड़ा ज्यादा था।

इस फ्लैट की मालिकिन, बिनीता दीदी, एक सुंदर और समझदार महिला थीं। बिनीता दीदी के बारे में अर्जुन ने सुना था कि वह बहुत सख्त और अनुशासनप्रिय हैं, लेकिन अर्जुन ने कभी उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की थी।

जब वह पहली बार फ्लैट देखने गए, तो बिनीता दीदी ने उन्हें अपने घर के नियमों के बारे में बताया।

बिनीता दीदी की मुस्कान में कुछ ऐसा था, जो अर्जुन को अपनी ओर खींचता था, लेकिन वह खुद को संभालते हुए सिर्फ किराए के बारे में ही सोचते रहे।

समय के साथ, अर्जुन और बिनीता दीदी के बीच एक दोस्ताना रिश्ता बन गया। वे अक्सर एक-दूसरे से बातें करते, और अर्जुन को महसूस होने लगा कि बिनीता दीदी सिर्फ घर कीमा लकिन नहीं, बल्कि एक सजीव और समझदार इंसान भी हैं।

एक दिन, जब अर्जुन ऑफिस से थका हुआ वापस आया, तो बिनीता दीदी ने उसे चाय ऑफर की। बातचीत करते-करते,बिनीता ने कहा, "तुम यहां अकेले रहते हो, कभी-कभी घर की चुप्पी बहुत बेचैन करती है न अर्जुन ने जवाब दिया, "हां, मगर अब तो इस चुप्पी में आपकी आवाज़ भी आ जाती है।" वह पल कुछ ऐसा था,

 जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के दिलों में हल्की सी जगह बनाई थी। धीरे-धीरे उनका रिश्ता और भीगहरा होने लगा। एक दिन अर्जुनने बिनीता से कहा, "मुझे तो घर चाहिए था, दिल नहीं। लेकिन अब मुझे लगता है कि दिल ही वह घर है, जो मुझे सबसे ज़्यादा चाहिए था।

बिनीता दीदी मुस्कुरा दीं और कहने लगीं, "मैं भी यही सोच रही थी। कभी-कभी हमें वही मिलता है, जिसकी हमें सबसे कम उम्मीद होती है।"

और फिर, अर्जुन और बिनीता के बीच सिर्फ एक किराएदार और मालिकिन का रिश्ता नहीं, बल्कि एक सच्चे प्यार का रिश्ता बन गया।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

Romantic kahani

 एक छोटे से पहाड़ी गाँव में, जहाँ हरियाली और शांत वातावरण था, आरव नाम का एक युवक रहता था। वह अपने संगीत के प्रति गहरी लगन रखता था और बाँसुरी बजाने में माहिर था। गाँव के लोग उसकी मधुर धुनों से मंत्रमुग्ध हो जाते थे।



एक दिन, गाँव में एक नई लड़की, सिया, अपने परिवार के साथ रहने आई। सिया को प्रकृति से बेहद प्रेम था और वह अक्सर गाँव के आसपास की वादियों में घूमने जाती थी। एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, सिया ने बाँसुरी की मधुर धुन सुनी और उसकी ओर खिंची चली गई।


वह देखती है कि एक पेड़ के नीचे बैठा युवक बाँसुरी बजा रहा है। धुन इतनी मधुर थी कि सिया मंत्रमुग्ध हो गई। धुन खत्म होने पर सिया ने ताली बजाई, जिससे आरव चौंक गया। दोनों की नजरें मिलीं, और एक अनकहा संबंध स्थापित हो गया।


धीरे-धीरे, सिया और आरव की मुलाकातें बढ़ने लगीं। सिया की उपस्थिति से आरव की धुनों में और भी मिठास आ गई, और सिया को आरव के संगीत में अपनी आत्मा का सुकून मिला। दोनों ने एक-दूसरे के साथ समय बिताना शुरू किया, और उनके बीच प्रेम की कोमल भावना पनपने लगी।



एक दिन, गाँव में एक संगीत समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें आरव ने अपनी बाँसुरी से सभी का मन मोह लिया। सिया ने भी अपने नृत्य से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह के अंत में, आरव ने सिया के सामने अपने प्रेम का इज़हार किया, और सिया ने मुस्कुराते हुए उसे स्वीकार किया।


गाँव के लोग उनकी प्रेम कहानी से खुश थे और उन्होंने उनके मिलन को आशीर्वाद दिया। आरव और सिया ने मिलकर संगीत और नृत्य के माध्यम से अपने प्रेम को अभिव्यक्त किया और गाँव में खुशियों की नई धुन बिखेर दी।


उनकी प्रेम कहानी इस बात का प्रतीक बन गई कि सच्चा प्रेम संगीत की तरह होता है, जो दिलों को जोड़ता है और जीवन को मधुर बनाता है।


 

अंतरवासनाएं

 अंतरवासनाएं



मन के कोने में छुपी हुई,
सपनों की छोटी-सी दुनिया,
जहाँ ख्वाहिशें मचलती हैं,
और विचारों की धारा बहती है।

कभी उमंगों का सागर बनती,
कभी शंका का बादल घिर आता।
हर भावना की गूंज सुनाई देती,
हर उम्मीद को नया रंग मिलता।

गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

किसी लड़की को पहली बार


किसी लड़की को पहली चोदते समय लड़कों को कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए ?


चूत में जोर जोर से झटके ना लगाएं।

बुधवार, 11 दिसंबर 2024

महिलाएं पुरुषों की तुलना में सेक्स के बारे में ज्यादा सोचती है

46% महिलाएं अपने साथी के साथ संभोग के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की कल्पना कर रही होती है।
 

सच्चा प्यार हो जाने के बाद लड़की बेकार की बातें करना बंद कर देती है वो अपने पार्टनर के साथ भविष्य की बातें करना पसंद करती हैं।


एक मर्द बिना संबंध बनाए बीस दिन तक रह सकता है उसके बाद से बेचैनी होने लगती है।


जब कोई आपके साथ घर में होता है तो वह आपके साथ रहने के बहाने ढूंढता है और ज्यादा से ज्यादा आपके साथ बिताना चाहता है।

आपसे कभी नहीं कहेगी बल्कि आपको खुद महसूस करना होगा कि वे आपसे क्या चाहते हैं।



मनोविज्ञान के अनुसार यह पता चला है कि ज्यादातर पुरुष महिलाओं की चेस्ट तरह घूरते हैं लेकिन आपको बता दें कि महिलाओं के चेस्ट की तरफ घुरना किसी भी पुरुष को शर्मिंदा कर सकता है।


मनोविज्ञान कहता है कि महिलाएं किसी पुरुष से प्रेम करने के लिए 15 दिन का समय लेती है जबकि पुरुष इसी महिला के साथ करने के लिए 8 से 10 दिन ही समय लेते हैं ।





मंगलवार, 10 दिसंबर 2024

साइकोलॉजी के अनुसार

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साइकोलॉजी के अनुसार

आप जितना अधिक संभोग करोगे

आपके जीने की इच्छा उतनी ही अधिक बढ़ जाएगी


जब उस औरत के बूब को जोर से दबाते हैं

तो उसकी कामुकता बढ़ जाती है ।

औरत की योनि चाटने के फायदे

 

औरत की योनि चाटने के फायदे

 संभोग क्रिया के दौरान अक्सर यह सवाल आता है कि इसलिए की योनि चाटना सही है या गलत क्या इसके कोई फायदे हैं या नुकसान



दोस्तों संभोग क्रिया के दौरान किया जाने वाला यह एक महत्वपूर्ण कार्य है जिसमें पुरुष के को बहुत मजा आता है और इस क्रिया के दौरान उसे चरम आनंद प्राप्त होता है और कहीं ज्यादा इस क्रिया में स्त्री को मजा आता है ।

 वह इस क्रिया के दौरान मजे में पागल हो जाती है और बहुत अधिक उत्तेजित हो जाती है पर पुरुष के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि योनि को चाटने के क्या फायदे हैं ।



स्त्री की योनि को चाटने का सबसे फायदा ही फायदा है कि इस क्रिया से स्त्री बहुत उत्तेजित हो जाती है और संभोग करने के लिए जल्दी मांगी जाती है ।
स्त्री को संभोग क्रिया के लिए जल्दी से तैयार करने के लिए आप यह तरीका अपना सकते हो जो लोग शीघ्र पत्न की बीमारी से पीड़ित हो वो लोग यौनि चाटने वाले तरीके अपना सकते हैं

क्योंकि इससे इतनी जल्दी चरम सीमा तक पहुंच जाती है और पुरुष को ज्यादा देर तक संभोग करने की जरूरत नहीं पड़ती है और दोनों को संभोग क्रिया में सुख प्राप्त होता हैं।

सोमवार, 9 दिसंबर 2024

औरत की क्या चीज गुलाबी होती है।

औरत की क्या चीज गुलाबी होती है।

पूरे शरीर की तुलना में होंठों की त्वचा सबसे पतली और सेंसिटिव होती है।

इसके भीतर मौजूद कैपिलरीज (छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं) में होने वाले रक्त संचार के कारण ही इनकी रंगत गुलाबी दिखती है।